प्रेमशूल का घाव |
बहुत दिनों के बाद आज,
जब नींद टूटी,
जब नींद टूटी,
जागा में एक तीव्र वेदना,
और दर्द के साथ
जख्जोर स्वयं को देखा,
अन्दर ,
पाया मन में घाव
अश्रु बह गए,
संग रोया मन,
सुनकर के वह आह: ||
ईश्वर से फिर
कारण पूछा ?
आया एक उद्घोष !
ये तू है !
तेरा ही तो है,
प्रेमशूल का घाव |
दिनेश आर्य "दिनू"
एक प्रेमी जो अभी अभी अपनी प्रेमिका से अलग हुआ है , और अपनी खुशियों को बनावटी और छद्म माध्यमों से प्राप्त करना चाहता है अचानक एक सुबह अपने हसीं सपनो को तोड़ता उठ बैठता है और उस दर्द को महसूस करता है , जिसको वो भूलने का स्वांग कर रहा है | इसी अंतर्द्वंद के बीच ईश्वर या यूँ कहें अपने आप से हुआ संवाद है. "प्रेमशूल का घाव "
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