कौन बचाए दिल्ली |
कहीं धुप्प अँधेरे में दिखती,
रोशनी की उम्मीद सी दिल्ली |
रोशनी की उम्मीद सी दिल्ली |
खामोश सन्नाटे को चीरती,
अबोध बाल किलकार की फरियाद सी दिल्ली |
अबोध बाल किलकार की फरियाद सी दिल्ली |
आज खामोश है, किसी चिर मूर्छा में लक्ष्मण की नींद सी |
आये कोई , हनुमान संजीवन संग और दे प्राण , बचाए दिल्ली |
दिनेश आर्य "दिनू"
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